Thursday, August 11, 2011

विभाजन है एक नितांत असत्य


                          
   15 अगस्त का दिन कहताआजादी अभी अधूरी है,
       सपने सच होने बाकी हैंरावी की शपथ न पूरी है.


15  अगस्त के दिन यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ये बात कही जा सकती है कि अखंड भारत के बिखरे हुए खण्डों को जब तक पुनः जोड़कर एक नहीं किया जायगा तब तक यह आज़ादी अधूरी है. 14 अगस्त का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक दिन है जब भारत को रक्तरंजित कर दो टुकड़े कर दिए गए. इस दिन को विभाजन तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजों की नीतियां और साथ ही मुस्लिम लीगखिलाफत आन्दोलन जैसे बहुत कारण रहे. भारत इस दिन को अखंड भारत दिवस के रूप में मनाता है तो पाकिस्तान इसे अपने स्वतंत्रता दिवस के रूप में. जिन्ना और लॉर्ड माउन्ट बैटन ने षड़यंत्र से अखंड भारत का विभाजन कर अपना एक मुल्क तैयार किया. इन्हें दो नाम दिए- भारत और पाकिस्तान. कट्टरता के नाम पर  यह विभाजन विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र राष्ट्र के लिए एक बड़ा नुकसान था इसके बावजूद जिन्ना की इस मांग को स्वीकार करना पडा. हालांकि कई महापुरुष विभाजन पर असहमत रहे. प्रसिद्द लेखक श्री गुरुदत्त ने अपने उपन्यास में लिखा है -"देश विभाजन कभी ठीक नही माना जा सकता. यह क्यों हुआकिसने किया और इसको कैसे मिटाया जा सकता हैये प्रश्न देश के सम्मुख और तब तक रहेंगे जब तक यह विभाजन मिट नहीं जाता सामयिक चिंताओं से ग्रस्त लोग भले ही नाक की नोक के आगे न देख सकें परन्तु दूर द्रष्टि रखने वाले तो इस प्रश्न पर विचार करेंगेभारत एक होकर रहेगा ही". 
                                  विभाजन से असंतुष्ट हो गांधी जी ने कहा था "विभाजन एक नितांत असत्य है उसके सिद्धांतो को स्वीकार करना मेरे लिए परमात्मा को अस्वीकार करने जैसा है". वहीँ स्वातंत्र्य वीर सावरकर का कहना था कि "यदि इस अपने समाज को जागृत और संगठित कर सकें तो वह दिन दूर नही जब भारत एक होकर रहेगा". यह देख पता चलता है कि उस समय भी विभाजन पर सभी के बीच असंतुष्टि थी. ये वे लोग हैं जो पूर्णतया भारत भूमि के रक्षक तथा राष्ट्रप्रेमी थे लेकिन यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि एक अलग मुस्लिम मुल्क पाकिस्तान बनाने के बाद भी वहां फैली अशांति देख जिन्ना यह महसूस करने लगे थे कि यह विभाजन अनुचित ही था.  दीनदयाल उपाध्याय जी ने इस पर कहा था "अखंड भारत मात्र एक विचार न होकर विचारपूर्वक किया हुया संकल्प है, कुछ लोग विभाजन को पत्थर की लकीर मानते हैं. यह ठीक नही है".      
आजादी के 64 वर्ष पूरे होने पर यहाँ यह कहना उचित होगा कि आज जहां पाकिस्तान आस्तीन के सापों(तालिबान और आतंक ) को झेलने को मजबूर है वहीँ भारत पाकिस्तान से अधिक स्थिर है. कश्मीर, भारत का एक और ऐसा हिस्सा है जिस पर दशकों से पाकिस्तान अपनी नजर गड़ाए बैठा है. भारत में पाकिस्तानी आतंकियों ने घुसपैठ कर कश्मीर में हिंसा फैलाए हुए है . यह भारतवासियों का धर्म है कि भारत कि इस मिट्टी को खुद से अलग न होने दे और भारतभूमि फिर एक हो जाए.
दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनायेंगे, गिलगित से गारो पर्वत तक, आजादी पर्व मनायंगे. 
उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से, कमर कसें बलिदान करें जो पाया उसमे खो ना जाएँ, जो खोया उसका ध्यान करें.             

1 comment:

  1. विभाजन असत्य ही नहीं कृत्रिम भी है. अब आगे और विभाजन न होने पाए इसके लिए भी लड़ने की आवश्यकता है...

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