Saturday, April 21, 2012

टेलीविज़न के बदले-बदले अंदाज़...


वन्दना शर्मा
आज के दर्शक के लिए टेलीविज़न के मायने पूरी तरह बदल गए हैं। अब टेलीविज़न `चैटर बॉक्स` होने से काफी आगे निकल गया है। सेटेलाइट टेलीविज़न, केबल टीवी और डीटीएच से होते हुए अब यह `ऑनलाइन टेलीविज़न` यानी कि `इंटरनेट टेलीविज़न` तक पहुंच चुका है। एक डिब्बे से आगे बढ़कर दुनिया से हाथ मिला रहा है।
अब से पहले हमें टेलीविज़न देखने के लिए टीवी के साथ अपॉइंटमेंट लेनी पड़ती थी, एक विशिष्ट समय पर विशिष्ट प्रोग्राम के लिये। अब कम्प्यूटर स्क्रीन के ऊपर टेलीविजन देखने वाला व्यक्ति एक साथ कई काम करने में सक्षम है। वह एक ओर दुनिया के साथ सोशल नेटवर्किंग में फेसबुक या ट्विटर आदि के जरिए बाकी लोगों से जुड़ा होता है तो वहीं दूसरी ओर, उसी स्क्रीन से `इंफोटेनमेंट` कर रहा होता है। यानी इंफोर्मेशन लेने के साथ-साथ टीवी की दुनिया में भी पास रह सकता है।
अब यह कहा जा सकता है कि कम्प्यूटर एक मल्टीपल स्क्रीन का काम करने लगा है। एक सर्वे में यह पाया गया कि ऑनलाइन टीवी देखते हुए लगभग 22 फीसदी लोग फेसबुक पर यह शेयर करते हैं कि वे टेलीविजन पर कौन सा प्रोग्राम देख रहे हैं।
ऑनलाइन टेलीविजन से यह फायदा है कि इसमें डिजिटल पिक्चर के साथ-साथ आवाज भी अच्छी गुणवत्ता वाली होती हैं। जिससे आज टेलीविजन की मनोरंजन की दुनिया हमारी मुट्‌ठी में सिमट गई है जिसे हम अपने अनुसार समय में बांध सकते हैं। 
भारत में ऑनलाइन टेलीविजन को देखने के लिये इंटरनेंट प्रोटोकॉल टीवी (आईपीटीवी) की आवश्यकता होती है जिसके जरिये इंटरनेट, ब्रॉडबैंड की मदद से टीवी कनेक्शन घरों तक पहुंचाया जाता है। इसे सब्सक्राइब करना जरूरी है।
गौरतलब है कि सूचना के इस नये संसार में सबसे पहले एबीसी का `वर्ल्ड न्यूज नाउ` ऐसा कार्यक्रम था जो इंटरनेट पर प्रसारित किया गया।
यूरोप के 60 से अधिक देशों में आज ऑनलाइन टीवी के लगभग 2000 चैनल चलते हैं।
साल 2012 के 10 सबसे लोकप्रिय इंटरनेट चैनल के रूप में `हुलू` को चुना गया है। हर चैनल के अपने कंटेंट होते हैं। `हुलू` के कंटेंट को सबसे बेहतर माना गया है। दूसरे नंबर पर `अमेजन डॉट कॉम` को चुना गया है जबकि तीसरे पर `इंस्टेंट वीडियो` को। 
कहने का मतलब है कि अब दर्शक को टेलीविजन के `दास` बनकर नहीं रहना पड़ता है। इंटरनेट पर एक क्लिक के साथ आप टेलीविजन की दुनिया में से कुछ भी, जो आप चाहें-जब चाहें, देख सकते हैं। 
इन चैनलों पर कुछ नियम भी लागू कराये जाते हैं। जैसे कोई भी इंटरनेट चैनल किसी भी टीवी शो को अपनी मर्जी से प्रसारित नहीं कर सकता है। इसके लिये उसे कुछ `राइट्‌स` लेने होते हैं।
जैसे `हुलू` चैनल पर जो कंटेंट है उसमें बहुत कुछ है जो शायद इसलिये ही बेहतर माना गया है कि इसमें हर तरह के गाने, फिल्में और साथ ही लगभग 100 टीवी शो एक ही जगह पर हैं।
यदि आप दशकों पुराने सीरियलों को फिर से देखने के शौकीन हैं तो वह भी आपको यहां आसानी से मिल जाएगा। इसके अलावा स्पोर्ट्‌स, हैल्थ, एनिमेशन, डॉक्यूमेंट्री या अन्य किसी भी पसंदीदा विषय में देख-सुन  सकते हैं।
ऑनलाइन चैनलों में एक खास बात यह भी है कि किसी भी वीडियो, डॉक्यूमेंट्री या और किसी भी संबंधित कंटेंट को हम अपने किसी भी दोस्त के साथ साझा कर सकते हैं। दर्शक उसे अपनी ओर से रेटिंग यानी पसंद के अनुसार पहले दूसरे या तीसरे दर्जे का स्थान दे सकते हैं। किसी भी कार्यक्रम को सर्च कर कहीं भी उस तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके साथ ही इसके पुराने एपिसोड भी देखे जा सकते हैं।
एक ओर यह हमें दशकों पुराने कार्यक्रमों से जोड़ता है  तो दूसरी ओर हमारे वक्त की बचत भी करता है। अब दर्शक को किसी भी धारावाहिक या आवश्यक कार्यक्रम के इंतजार में घंटों टीवी के सामने नहीं बैठना पड़ता।
इस वैज्ञानिक युग में नवीन तकनीकी आविष्कार को भी अन्य आविष्कारों के साथ जुड़कर चलना होता है। तकनीकी विकास के चलते मनोरंजन की दुनिया अब पूरी तरह दर्शक के हाथ में होने जा रही है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण एप्पल इंक ने प्रस्तुत किया है ।
दरअसल, इसे विस्तार देने के लिए एप्पल इंक एक ऐसा टेलीविजन बाजार में लाने की तैयारी में है जो दर्शक को उसकी इच्छा के अनुसार धारावाहिक या फिल्म को तत्काल देखने की सुविधा देगा। यह टीवी चैनलों के साथ-साथ ऑनलाइन दुनिया के साथ भी जुड़ा रहेगा। इसके दर्शकों को किसी रिमोट कंट्रोल की आवश्यकता नहीं होगी।
इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि उपयोगकर्ता मोबाइल फोन, आइपैड या आवाज भी इससे नियंत्रित कर सकेगा। जबकि, दर्शक के पास इंटरनेट कनेक्शन होना भी इसके लिये जरूरी शर्त है।
हालांकि आम लोगों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय होने वाली वीडियो साइट यू-ट्‌यूब है जो दर्शकों को बिखरे हुए रूप में ही सही लेकिन इंटरनेट पर कार्यक्रमों के हिस्सों को उपलब्ध करा रही है। 
इस तरह के गैजेट्‌स के आ जाने से आज के युवाओं की जिंदगी के बदलाव अपने शबाब पर हैं। वह समय तो अब बिल्कुल जा चुका है जब पूरा परिवार हॉल में एक साथ बैठ टेलीविजन पर फिल्मों और धारावाहिकों का लुत्फ लिया करता था। एक ही टेलीविजन पर अलग-अलग कार्यक्रम देखने के लिये छोटी-छोटी लड़ाईयां हुआ करती थीं।
इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि ऑनलाइन टीवी  दर्शकों की टीवी पर निर्भरता को लगभग खत्म कर देगा।



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