Monday, April 11, 2011

बॉलीवुड के लिए डिजिटल तकनीक बनी वरदान

                                                                                                                                                                                                

dev saahab ki ek behtareen film
हिंदी सिनेमा यानी बॉलीवुड में एक नया दौर आया है। बहुत-सी फिल्मे पुराने दौर से आज के इस नए दौर का सफ़र करती हुई उससे ज्यादा लोकप्रिय हुई जितनी वो अपने उस जमाने में भी नही हो पाई थीं। देवदास, नया दौर, हम दोनों और मुगले-ए-आज़म जैसी कुछ फ़िल्में जो एक बार फिर से पर्दे पर आईं दर्शकों द्वारा खूब पसंद की गईं। इसका सबसे बड़ा कारण यह रहा कि ये फ़िल्में उस जमाने में रंगीन नही थीं बल्कि श्वेत-श्याम थी।

लेकिन जब इन फिल्मों को दोबारा लोगों के सामने लाया गया तो ये रंगीन होने के साथ-साथ अपने डिजिटल स्वरूप में भी थी। नई पीढ़ी के लिए तो ये किसी नई फिल्म जैसी ही हैं जो उन्हें अपनी विरासत का ज्ञान बांटने में भी सफल हो रही हैं। इस नए दौर की तकनीकी से भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक तथा पुरानी फिल्मों को सहेज कर रखना और भी आसान हो गया है। इस तरह से पुरानी फिल्में नए रंग रूप में सजकर बड़े पैमाने पर देश-विदेश में पैसा कमाने में सक्षम हो रही हैं।

कंप्यूटर की इस नई तकनीक से पुरानी फिल्मों को डिजिटल रूप देकर जो पुनर्निर्माण किया जा रहा है, जिससे भारतीय क्लासिकल फिल्मों को संरक्षित करने में मदद मिल रही है। इस नई तकनीक के आने से पहले मूल श्वेत-श्याम फ्रेम पर नए रंगों को आरोपित कर इन्हें रंगीन किया जाता था इसके रंगों में स्पष्टता का अभाव रहता था। लेकिन डिजिटल प्रणाली में मूल श्वेत-श्याम छवि की वास्तविक जानकारियां रहती हैं। इसमें तकनीकी विशेषज्ञ प्रत्येक शॉट में हर पात्र के इन बिंदुओं (पिक्सल) और उस शॉट के बीच उन पात्रों में किसी भी प्रकार की गतिशीलता और उसके प्रभाव स्वरूप प्रकाशीय स्थिति में परिवर्तन का सूक्ष्मता से अध्ययन करते हैं। कंप्यूटर द्वारा पात्र के हरेक पहलू को रंगीन कर दिया जाता है।

'लिजेंड्स फिल्म्स संस्था' जिसने हाल ही में देवानंद की क्लासिक फिल्म 'हम दोनों' का रंगीन संस्करण तैयार किया, जिसकी दर्शकों द्वारा बहुत प्रशंसा भी की गई। हालांकि हमारे देश में यह तकनीक थोड़ा देर से आई है लेकिन यह भारतीय फिल्मों को नया जीवन दे रहा है।
इस तरह यह फिल्म डिजिटल कलराईजेशन तकनीक श्वेत-श्याम दौर की अनेक विरासतों (फिल्मों) को सहेजने में एक वरदान साबित हुई है।आशा है 'दो बीघा ज़मीन' जैसी अन्य फ़िल्में भी जल्द ही रंगीन पर्दे पर दिखाई देंगी।

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