Monday, April 11, 2011

आमजन का 'जन लोकपाल बिल'

देश को चाहिए और कई अन्ना
 एक बूढा आदमी  है मुल्क  में या यों कहो
इस अँधेरी कोठरी में एक रौशनदान है...
आज ये  पंक्तियाँ अन्ना हजारे के लिए खरी साबित हो रही हैं। अन्ना हजारे जिस तरह देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल बिल की मांग को लेकर खड़े हुए और और उनके पीछे जनसैलाब चलता चला गया। अन्ना को अपने आमरण उपवास पर बैठने से  पहले तक भी यह नही पता था कि  हजारों लोगों का गुस्सा उनके साथ लावे की  तरह पीछे चलेगा और आवाज़ उठायगा।
भ्रष्टाचार से आजिज़ हो चुकी जनता के लिए अन्ना एक आदर्श बन गए। 98  घंटे चले इस आन्दोलन में हर घंटे नए- नए लोग जुड़ते चले गए। लोगों ने अन्ना से प्रभावित होकर उन्हें देश के दूसरे गांधी का नाम दे दिया।  हालांकि गांधी और उनमे कई असमानताएं हैं।
जनता को अब यह समझ आ चुका है कि और इंतज़ार नही किया जा सकता अगर आज कुछ नही किया गया तो देर हो जायगी, भविष्य खतरे में पड़ जायगा। वहीँ मीडिया ने भी इस आन्दोलन को चरम तक पहुंचाने में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। मीडिया की और से जो आवाज़ आई वो यही थी कि-
हो गई है पीर पर्वत सी अब पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए....
यही कारण रहा  कि इस मुहीम में लोग दूर-दूर से अपना समर्थन देने आये और लगभग 160  लोगों ने अन्ना के साथ व्रत रखा। जंतर- मंतर पर शुरू हुई इस मुहीम में सबसे सुखद बात यह रही कि यहाँ किसी भी नेता या राजनेता को शामिल नही होने दिया गया। अन्ना की इस कवायद में साथ देने बोलीवुड की कई बड़ी हस्तियाँ, स्कूल -कोलेज के छात्र-छात्राएं और कई परिवार भी आये। अब तक यह माना जाता था कि नई  पीढ़ी या आम आदमी अपने घर से दफ्तर और दफ्तर से घर की निजी ज़िन्दगी में ही व्यस्त है। उसके पास देश के बारे में सोचने का वक़्त नही है। लेकिन अन्ना के साथ कदम मिलाते इन लोगों ने ये सब भ्रम दूर कर दिए।

छोटा पड़ता जंतर मंतर और बड़ा होता आन्दोलन देखकर सरकार को झुकना पड़ा।  सरकार ने मानसून सत्र तक  लोकपाल बिल पास करने का वायदा कर तो दिया लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि यह पूर्णतया पाक- साफ़ होगा? दर इस बात का है कि देश को लगा घुन लगा यानी वही मौकापरस्त लोग  इसे भी भ्रष्ट ना कर दें .
   

3 comments:

  1. vandana g ....aap k vichaar ati uttam hai lekin aap ne jo kaha ki sarkaar ko jhukna pada to sayad aap ne sahi dhang se is drame ko n hee dekha or n hee suna.ye sub political drama tha sirf dhumil huee congress ki chhavi ko vapas bnane k liye taaki aagami chunavo me iska laabh congress ko mil sake..

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  3. accha lekh h lekin ab dekhna ye hai ki anna ji ki aandhi ke baad sarkaar ka dhulmul ravaiye mein kuch parivartan hota h ya nhi....

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