Tuesday, September 6, 2011

अधूरे और टूटे संवाद




तन्हा नहीं थे हम इतने कभी 
वो तो तुम आये और
हमें तन्हा करके चले गए 
शायर तो नहीं थे हम
शायर हमे तुम्हारी जुदाई ने बना दिया  
हम तो खड़े ही वहां हैं 
जहां से तुम हाथ झटक कर चले आये
अब इतने ख़फा हो हमसे के 
अनसुनी कर दी हमारी हर एक बात 
रख लो सारी बेरुखी और वो सब एहसास अपने पास
नहीं संभलते हमसे अब 
हम दोनों के ये अधूरे और टूटे संवाद..... 

1 comment:

  1. उम्मीद से बढ़कर लिखा है! ऐसा लेखन जारी रखें.

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