Thursday, May 17, 2012

चोरी सूचनाओं की भी होती है...



आज न्यू मीडिया के रूप में हमारे सामने सोशल नेटवर्किंग साइट्स (फेसबुक, माइस्पेस, ट्विटर, ऑरकुट, फ्रेंडस्टर), विकीपीडिया और ब्लॉग और बहुत कुछ दिखाई देता हैं। हालांकि, इस डिजिटल दुनिया का कोई दायरा नहीं है। 
नए ज़माने के इस मीडिया के बीच सूचनाओं में क्रिएटिविटी, शेयरिंग यानी ऑनलाइन लेन-देन और एक के बाद दूसरे क्लिक से होकर गुजरने में सूचनाओं और व्यक्ति की निजता की गोपनीयता यानी ‘सोशल आइडेंटिटी‘ खत्म होती जा रही है। जिसकी जानकारी लोगों में नहीं होती। 
जिन टूल्स के प्रयोग से सोशल मीडिया का इस्तेमाल इतना आसान बना है वहीं दूसरी ओर उसी आसानी के साथ उनका दुरूपयोग भी किया जा रहा है। सोशल नेटवर्किंग साइटों का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों की ‘आइडेंटिटी थेफ्ट‘ का खतरा बना हुआ है।  
सोशल नेटवर्किंग साइटों के उपयोगकर्ताओं में हर उम्र वर्ग के लोग शामिल हैं। जो बेधड़क उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से देश में आज आईटी सिक्योरिटी एक चिंता का विषय बना हुआ है। जिसका एक हालिया उदाहरण अभिषेक मनु सिंघवी के रूप में सबके सामने आया। जिसे संभाल पाना भी मुश्किल दिख रहा था।
आजकल किसी भी व्यक्ति के शौक, आदतें, पसंद-नापसंद और प्रोफेश्नल अनुभवों के बारे में जानकारी लेना कोई मुश्किल भरा काम नहीं रह गया है।  
सोशल नेटवर्किंग साइट्स के प्रोफाइल पेज पर कुछ उपयोगकर्ता बेवजह अपनी निजी जानकारी को सार्वजनिक कर देते है। जिनमें अपने घर का पता, जन्मतिथि, भाई-बहनों या रिश्तेदारों के नाम, फोन नम्बर, दोस्त, अपने निजी संबंध या उनसे जुड़ी फोटो न जाने क्या-क्या।
डिजिटल दुनिया के ऐसे उपयोगकर्ताओं में सबसे बड़ी संख्या किशोरों और युवाओं की है जो खुद को ज्यादा से ज्यादा उजागर करने की जुगत में लगे रहना चाहते हैं। यही उन्हें एक मुसीबत में फंसा देने के लिए काफी होता है। ये जानकारियां जाने-अनजाने उन हाथों में पहुंच जाती हैं जो भविष्य में खतरा पैदा कर सकती हैं।  
इस तरह की व्यक्तिगत जानकारियों के डिजिटल दुनिया पर सार्वजनिक होने के बावजूद हर सोशल नेटवर्किंग साइट अलने उपयोगकर्ताओं को अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स भी रखते हैं। लेकिन इनका प्रयोग बहुत ही कम उपयोगकर्ता करते हैं। दरअसल, व्यक्ति उन सेटिंग्स को समझना फिर उनका इस्तेमाल करना जरूरी नहीं समझते हैं।
आज जहां ऑनलाइन खरीदारी से एक खरीदार का जीवन आसान हुआ है वहीं गोपनीयता और निजता का सबसे बड़ा खतरा इन्हीं खरीदारोें के लिए पैदा हो गया है। कोई भी थर्ड पार्टी यानी अन्य व्यक्ति उपयोगकर्ता के कार्ड या उसके नम्बर तक आसानी से पहुंचकर हैक कर लेता है। जिसका पता तक नहीं चलता और लुटने वाला बैठे बिठाए लुट जाता है। 
हाल ही में, डिजिटल दुनिया से होने वाले खतरों के बारे मे जानकारी के लिए यूरो आरएसजीसी ने भारत समेत 19 देशों के इंटरनेट उपभोक्ताओं पर एक सर्वे किया। इस सर्वे के मुताबिक, डिजिटल क्रांति ने लोगों की निजता को लगभग खत्म-सा कर दिया है। 
19 देशों के इन सभी लोगों की सबसे बड़ी चिंता ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर थी। इनमें से 60 फीसदी लोगों का कहना था कि सोशल मीडिया पर निजी जानकारियां देना गलत है। 
बहुत से लोग ऐसेे भी होते हैं जो साइट पर सार्वजनिक तौर पर सूचना देने के बाद पछताते हैं। क्योंकि जो भी व्यक्ति अपने प्रोफाइल पर कोई भी सूचना डालता है उसे और उन पर हुए कमेंट को निजी रखना चाहता है।
पर, सच तो सह है कि जब डिजिटल दुनिया में कोई जानकारी एक बार पब्लिश हो जाती है तो उसका दूसरा चरण सार्वजनिक होना ही है।
यदि उपयोगकर्ता अपनी कोई सूचना या फोटो आदि को साइट पर डालकर उसे डिलीट कर भी देता है तो भी वो  कहीं ना कहीं इंटरनेट के जाल में रह जाती है जिसकी जानकारी किसी को नहीं होती। 
हाल ही में एक नाबालिग लड़की की कुछ फोटो उसकी सोशल नेटवर्किंग साइट से चुराकर उसे ग़लत जगह इस्तेमाल कर दिया गया था। जिससे पुलिस भी काफी मशक्कत करने के बाद उस अपराधी तक पहुंच पाई। यह कोई पहला ऐसा वाक्या नहीं था जिसमें ऐसी बात सामने आई हो। इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
वैसे तो, सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नकेल कसना कोई  आसान काम नहीं है। फिर भी, इन साइटों को फिल्टर कर अपने गलत कंटेंट पर लगाम लगाने का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। 
इस निजी जानकारी की चोरी से बचने के लिए एक यही रास्ता अपनाया जा सकता है कि सोशल नेटवर्किंग करते समय इसके उपयोगकर्ता अपनी कोई भी निजी बात शेयर न करें। साथ ही, अपनी कोई भावना ज़ाहिर न करें जिसे सार्वजनिक रूप से करना किसी गलत तरीके से समझ लिया जाए। 
अपने प्रोफाइल पर अपनी निजी जानकारियों का कम से कम ब्यौरा देना चाहिए।
यदि कोई सूचना या निजी जानकारी दे भी रहे हैं तो सबसे पहले उस साइट और उसके टूल्स को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। 
युवाओं को कोई भी सूचना देने से पहले ठीक से सोच लेना चाहिए कि यह आगे चलकर कोई मुसीबत न बन जाए।

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