Sunday, November 6, 2011

AFSPA और कश्मीर

गर फिरदौस बार रुए जमीन अस्त हमीं अस्त हमीं अस्त ये शब्द फ़ारसी में मुग़ल बादशाह जहांगीर ने कहे थे. जिसका अर्थ है अगर इस धरती पर कहीं स्वर्ग है तो , वो यहीं है यहीं है.
कश्मीर खूबसूरत वादियों की एक जन्नत है जिसे आज इसी के हुक्मरान इसके दुश्मनों के हवाले करने को अमादा हैं.
कश्मीर के वजीरेआला उमर अब्दुल्ला द्वारा कश्मीर से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून हटाने के लिए  की जा रही मांग बिलकुल भी जायज नही है. सरकार  को कश्मीर से सेना हटाने के मुद्दे पर कोई भी फैसला लेने से पहले सभी कश्मीरी भाईयों के बारे में सोचना चाहिए. कश्मीर में कई ऐसी जगह हैं जो सिर्फ सेना की वजह से ही लोगों के लिए महफूज़ साबित हो रही हैं. एल..सी. के करीब बसा एक छोटा सा गाँव साम्बा है जहां सबसे ज्यादा आतंकी संगठन पनप रहे हैं , यहाँ लोग सेना का समर्थन करते हैं और श्रीनगर, रत्नागिरी, कंगना ये सभी स्थान आतंक और घुसपैठ से जूझ रहे हैं. हर महीने 3 -4 लोगों की हत्या हो जाती हैं. इसलिए यहाँ के सभी खौफजदा बाशिंदे सेना का समर्थन करते हैं उनका मानना है कि यहाँ सेना का होना जरूरी ही है. सभी कश्मीरी खुद को भारत का ही हिस्सा मानते हैं और यह सही भी है. यह बात पिछली हिंसाओं में साबित भी हो चुकी है कि पत्थरबाजी करने वाले लोग पैसों पर रखे जाते हैं. यानी वे खुद इसमें शामिल नही होते उन्हें किया जाता है. वहां का प्रमुख व्यापार सेब से ही होता है. देश-विदेश में  यहीं से सेब को पहुंचाया जाता है. प्रौद्यौगिकी में उन्नति की कमी की वजह से यहाँ बेरोजगारी की समस्या है. देश के सभी हिस्सों में लगभग प्रौद्यौगिकी के लिए प्रयास किये जा रहे हैं. लेकिन सभी बड़े उद्योगपतियों  के लिए कश्मीर में उद्योग स्थापित करना असम्भव है. कश्मीर घाटी और इसकी वादियों में दहशतगर्दों का गिरोह इस सेना का विरोध या समर्थन के इस  उधेड़ -बुन  में फलता-फूलता जा रहा है. हाल ही में हुए एक विदेशी अध्ययन में भी यही बात सामने आई कि दहशतगर्द लूटपाट, रेप या हिंसा कर उसका इल्जाम सेना पर लगा जनता को भड़काने का काम कर रहे हैं. यदि भारत सरकार को अपने राज्य कश्मीर के लिए कुछ करना ही है तो उसे कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 को खत्म कर कश्मीरियों को अन्य सभी राज्यों के सामान बनाना चाहिए. सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को कश्मीरियों की हिफाजत के लिए बने रहना जरूरी है. यह तब तक इसी तरह बना रहे जब तक पी के (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ) भारत के पास वापिस ना जाए. 4 व्यक्तियों कि सुरक्षा में चलने वाले नेताओं को अपनी तरह जनता की भी हिफाज़त का ख़याल होना चाहिए जो उन्हें आम लोगों के लिए महसूस नही होती.

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